11 दिसंबर 2018 - 16:16
मोसाद के महत्वपूर्ण संदेश लीक, हिज़्बुल्लाह से भय और यमन युद्ध में लिप्त होने की बात स्वीकार की

दुनिया भर में बदमान इस्राईल की जासूसी एजेंसी मोसाद के तीन दस्तावेज़ों के लीक होने से स्पष्ट हो जाता है कि इस्राईल, हिज़्बुल्लाह की सैन्य शक्ति से किस हद तक बौखलाहट का शिकार है।

मध्यपूर्व में मानवाधिकारों की अंतरराष्ट्रीय समिति के जनसंपर्क अधिकारी हैसम अबू सईद ने मोसाद और यहूदियों के एक संगठन के बीच होने वाले कोडेड संदेशों से पर्दा उठाया है।

सूत्रों के अनुसार, पहले संदेश में 200 इस्राईली सैन्य अधिकारियों को यमन स्थित एक अरब देश के वायु सैन्य अड्डे में तैनात करने की बात कही गई है।

इस कोडेड संदेश में कहा गया है कि इस संदेश के प्राप्त होने के तुरंत बाद, स्पेशल ऑप्रेशन की कमान और संयुक्त ऑप्रेशन की कमान इस पर अमल करें।

इस संदेश के डीकोड होने से सबसे पहली बात जो स्पष्ट होती है वह यमन युद्ध में इस्राईल की संलिप्तता है।

यमन मध्यपूर्व का सबसे ग़रीब देश है, जो सऊदी अरब के पड़ोस में स्थित है। सऊदी अरब ने मार्च 2015 में यमन के भगोड़े राष्ट्रपति मंसूर हादी को दोबारा सत्ता में पहुंचाने के उद्देश्य से अपने पड़ोसी देश के ख़िलाफ़ व्यापक हमले शुरू किए थे, जिसमें यूएई समेत कई देश उसका साथ दे रहे हैं। अमरीका भी यमन के ख़ुलाफ़ युद्ध में शामिल देशों विशेषकर सऊदी अरब और यूएई को हथियार दे रहा है और उनकी लॉजिस्टिक मदद कर रहा है। लेकिन इस्राईल ने कभी भी इस युद्ध में शामिल होने और यमन की ग़रीब जनता के जनसंहार में लिप्त होने की बात सार्वजनिक प्लेटफ़ार्म पर स्वीकार नहीं की है।

हालांकि यमन के जन आंदोलन अंसारुल्लाह के नेतओं ने कई बार युद्ध में इस्राईली सैनिकों के शामिल होने की बात कही है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कभी इसे गंभीरता से नहीं लिया गया। लेकिन मोसाद के इस संदेश के लीक होने से न केवल यमन युद्ध में इस्राईल के शामिल होने का आरोप सिद्ध हो गया है, बल्कि सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों के चेहरे से नक़ाब हट गया है जो ख़ुद को विश्व में मुसलमानो और इस्लाम का ठेकेदार बताते नहीं थकते।

सऊदी अरब और संयुक्त अरब इमारात अमरीका के हथियारों और इस्राईल के सहयोग से यमनी जनता का दमन कर रहे हैं, जिसे संयुक्त राष्ट्र संघ ने मानव इतिहास की सबसे भयानक त्रासदियों में से एक बताया है।

मोसाद के लीक होने वाले दूसरे संदेश से स्पष्ट हो जाता है कि इस्राईल, हिज़्बुल्लाह से किस हद तक भयभीत है। इस संदेश में हिज़्बुल्लाह के मिसाइलों की सटीक मारक क्षमता व तकनीक की बात कही गई है। इसके साथ ही यह भी स्वीकार किया गया है कि इन मिसाइलों के लॉंच पैड की लोकेशन और उनकी संख्या के बारे में सही जानकारी प्राप्त नहीं है।